यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के लिए बदलेंगे सार्वजनिक वाहनों के रूट

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प्रकाश बन्दूणी

नई दिल्ली। नई दिल्ली में सार्वजनिक वाहनों में सफर करने वालों के लिए खुशखबरी है। परिवहन विभाग जल्द ही सार्वजनिक वाहनों के रूटों में उपयोगिता के मुताबिक बदलाव या सुधार करने वाला है। इससे यात्रियों को उनके घर तक बेहतर यातायात की सुविधा मिलेगी। सोमवार को दिल्ली परिवहन मुख्यालय में हुई स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) बोर्ड की बैठक में डिम्ट्स की रिपोर्ट को मंजूरी मिल गई। आगामी 15 दिन में इसे धरातल पर उतारने की तैयारी है।
परिवहन विभाग काफी समय से सार्वजनिक परिवहन को और बेहतर करने के प्रयास कर रहा है। बसों, टैक्सी, ग्रामीण सेवा, आरटीवी और अन्य वाहनों की उपयोगिता बढ़ाने के लिए दिल्ली इंटेग्रेटिड मल्टी मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) को रूटों पर शोध करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, डिम्ट्स को यह रिपोर्ट तैयार करने में करीब एक साल लगा है। रिपोर्ट में दिल्ली के सभी सार्वजनिक वाहनों के रूटों का आंकलन किया गया है।
इसमें उन इलाकों को चिन्हित किया गया है, जहां सार्वजनिक वाहनों की पहुंच न होने के कारण यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके साथ ही उन रूटों पर भी शोध किया गया है, जिनकी उपयोगिता के हिसाब से वाहनों की संख्या अधिक है। रिपोर्ट के आधार पर डीटीसी बसों, क्लस्टर बसों, मिनी बसों, ग्रामीण सेवा, मिनी कैब, मैक्सी कैब, आरटीवी और अन्य सभी सार्वजनिक वाहनों के रूटों में सुधार किया जाएगा। रूटों की लंबाई को घटाया या बढ़ाया जाएगा।
नए रूटों पर छोटे-बड़े वाहनों को उपयोगिता के हिसाब से चलाया जाएगा। यात्रियों की सुविधा के लिए अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी के लिए छोटे सार्वजनिक वाहनों की उपयोगिता को बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। साथ ही, उन रूटों से वाहनों को हटाया भी जाएगा, जहां यात्रियों के लिए उपयोगिता न के बराबर है।
डिम्ट्स ने दिल्ली के सभी रूटों को सुव्यवस्थित करने के लिए शोध पर दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं। दिल्लीवासियों को बेहतर सुविधा देने के लिए सभी रूटों का आंकलन कई चरणों में पूरा किया गया है। इस आकलन के तहत निर्धारित होने वाले रूटों के लिए निजी सार्वजनिक वाहन चालकों को नए सिरे से आवेदन करने होंगे।
डिम्ट्स की रिपोर्ट के तहत निर्धारित रूटों पर वाहन चलाने के संबंध में अगले 15 दिनों में परिवहन विभाग टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इस प्रक्रिया के तहत एक एप्लीकेशन बनाने की बात भी सामने आ रही है, जिसके जरिये लोगों से रूटों पर वाहन चलाने के संबंध में आवेदन मांगे जाएंगे। इसके बाद रूटों की उपयोगिता के हिसाब से वाहनों को चलाने के लिए अनुमति प्रदान की जाएगी। इस योजना के तहत पांच-छह महीने में संशोधित या नए रूटों पर सार्वजनिक वाहनों को चलाया जा सकता है।

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